विज्ञापन

आधुनिक शिक्षित समय में बेरोजगारी

Dubey Riya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आधुनिक शिक्षित समाज में फैली बेरोजगारी,
        
                                                    
                            
डिग्रियां अलमारी में बेकार पड़ी हैं सारी।
योग्यता और दक्षता से मिलता नहीं काम अब,
जान- पहचान, रिश्वत से भरी हैं जगह सारी।

पढ़े- लिखे घूम रहे नहीं मिल रही नौकरी,
अपने स्तर का काम न मिलने से छा रही उदासी।
उच्च शिक्षा प्राप्त करके भी तलाश रहे नौकरी।
गंभीर मुद्दा है ये इस पर नहीं किसी का ध्यान।
कितना कमाए, कितना बचाएं सब हैं परेशान।

सारे स्वप्न पूरे कर पाएँ, इतनी अब कमाई नहीं,
अमीर- गरीब का फर्क बढ़ गया, पूछे भाई, भाई को नहीं।
न जाने कब ये समस्या दूर होगी।
कब वो दिन आयेगा जब बेरोजगारी दूर होगी।
रिया दुबे
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Mamta Tiwari

650 कविताएं

View Profile

dev chauhan

232 कविताएं

View Profile

Yunush khan

8144 कविताएं

View Profile