वर्षा की त्रासदी में मुंबई।
मुंबई तुम्हारी शहर में
वर्षा होगी मूसलाधार जब तब
भर जाएगीं नालियां
जलमग्न हो जायेंगे रास्ते
डूब जायेंगे घर अनेक
नष्ट हो जायेंगी वर्षों की मेहनत
चंद घंटों की जल वृष्टि से
और चीख चीख कर कहेंगे सब
क्या हिम्मत है मुंबईकरों में
आपदा जितनी भी बारम्बार ही
विनाश जितनी भी आपार हो
उभर आते हैं वे हर बार!!
और फिर होंगे चुनाव
प्रश्न नहीं करोगे उनसे
जिम्मेदार नहीं ब नआओगे उन्हें
उन्हीं के निर्देशों का पालन कर
अफसरों, ठेकेदारों ने बनाया
अट्टालिकाएं, रास्ते, नालियाँ, पुल,
और खुद के लिए आपार संपदा।
और तुम अथाह सहिष्णुता से
हर बार झेलोगे वर्षा का प्रकोप
क्योंकि तुम्हारे साथ हैं सच्चे मुंबईकर,
छीन जाएगी उनसे बहुत कुछ
उनसे मुंबई नहीं छिन सकता कोई
पुनः बस जाओगे तुम मुंबई।