क्या पूछा, राम से?
एक बार पूछ लिये होते राम से
तुम्हारे लिए मंदिर बना दूं एक नया?
अन्यथा अस्पताल बना दूं
तुम्हारी प्रजा के लिए?
तुम्हारे बच्चों के लिए स्कूल बनवा दूं?
और तुम्हारे भक्तों से
मरीजों का प्रेमपूर्वक इलाज करवा दूं
और तुम्हारे भक्तों से
बच्चों को मंतपूर्वक पढ़वा दूँ?
राम ना करते क्या?
वैसे क्या कमी है राम को
हज़ारों हैं मंदिर
करोड़ों हैं नाम जपने वाले
अरबों हैं जय श्रीराम बोलने वाले
अनायास ही लेते हैं राम का नाम
जब कुछ अच्छा हो या जब कुछ बुरा।
चलो जब बन ही गया भय मंदिर
और वे अंदर विराजमान थे
तुम पर विश्वास कर
फिर क्यों तुमने किया धोखा
क्यों ऐसी विश्वासघात?
क्यों नहीं संतुष्ट होते कभी
क्यों हर अवसर पर लोलुपता?
मंदिर है, आस्था की आवास
ऊर्जा है, मूर्तियों में, प्रवास
करोड़ों भक्तों का विश्वास
ले सकती है ऐश्वर्य, सत्ता वनवास
घर कर जाय अगर अविश्वास।