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यदि शुक्राना का दीपक जले

Dr. Shiv

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यदि शुक्राना का दीपक जले, हर दिन हृदय के भीतर,
        
                                                    
                            
सुख की किरणें फैल जाएँ, जीवन हो जाए मस्त मगनतर।

जो हर पल आभार करे, पाए अमृत की धार,
हर क्षण में आनंद मिले, हर लम्हे में अधिकार।

जब तुलना की आदत मन पर करने लगे राज,
सुख का सागर सूख जाए, ग़म का हो जाए जंजाल।

दूसरों को देख-देख कर, उठें मन में सवाल,
संतोष खो बैठे फिर, जीवन हो जाए बेहाल।

जो हर पल शुक्र करे, वही रहे खुशहाल,
तुलना करने वाला जन, रहे सदा ही मलाल।

दूसरों के घर देख-देख कर, मन में करे हिसाब,
अपने घर की रोटी भूले, खो बैठे उसका स्वाद।

 
2 महीने पहले
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