“सच्च की रौशनी”
रिश्तों की दुनिया में
कभी-कभी दिल उदास हो जाता,
प्रेम के दरिया अंदर,
कभी कभी धैर्य भी जवाब दे जाता।
छल और धोखे की हवाएँ,
रूह को जब झुलसाती हैं।
तब सच्च की रौशियाँ,
झूठ को सदा हराती हैं।
जीवन की इस लम्बी यात्रा में,सपने अधूरे ही रह जाते है,
पर यकीन की धड़कनें और अटूट विश्वास ही,
ज़ख्मों को स्वयं ही भरती हैं ।
इंसानियत रुपी वृक्ष है प्यारा,
वफ़ा के संग ही खिलता है।
जिसने सच्च को अपना लिया,
वही रूह से जीता है।
-शिव राय पुरी