काले-कालू कौवे ने नई निकाली थार।
काँव-काँव करता हुआ, पहुंच गया बाजार।
काला चश्मा पहनकर, निकला वह बन ठन।
कौवी रानी संग में, बैठी पुलकित मन।
उसे देख बंदर बोला मुझको संग घुमाना।
मिट्ठू बोला, मुझको भी तुम अपने साथ बिठाना।
मोर बोला, नाच दिखाऊँ, मुझको भी बिठलाना।
जंगल के सब मित्रों को तुम ,थार में अवश्य घुमाना।
कौआ बोला, आ जाओ, सब तुम सब बारी बारी।
मिल-जुलकर खुशियाँ बाँटें, दोस्ती सबसे प्यारी! 🎶
-संजीव रावत