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एक रूप में स्थिर रहो, बदलो मत व्यवहार।

Dr Preeti

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक रूप में स्थिर रहो, बदलो मत व्यवहार।
        
                                                    
                            
मान-अपमान के परे, रखो अपना आधार॥
रखो अपना आधार, न वश में किसी के आवो।
झूठे आदर-जाल से, निज को सदा बचावो॥
कहे 'पथिक' मत तोल तू, जग के आदर मोल।
निज विचार से सिद्धि है, रह तू केवल
एक रूप में अनमोल॥
एक महीने पहले
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