विज्ञापन

दूर से ही दुआ दीजिए

Dr Preeti

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दो दिलों के समंदर में उठते जो तूफ़ान हैं,
        
                                                    
                            
उनसे तिनके की तरह दूर रहना ही आसान है।
मियां-बीवी के झगड़े का अगर कोई तीसरा मोहरा बने,
तो सबसे बड़ी नादानी है कि वो और करीब खड़े।

जहाँ दो अपनों के बीच नीचा दिखाने की जंग हो,
जहाँ सिर्फ जीतने की ज़िद हो और मन में उमंग हो,
वहाँ प्रशंसा भी बन जाती है गाली का एक बहाना,
दिल का दर्द नहीं, वो तो बस एक टकराव पुराना।

जहाँ तुम्हारा नाम आते ही कड़वाहट और बढ़ जाए,
वहाँ से कदम समेट लेना ही समझदारी कहलाए।
बिना बुलाए उन दरवाज़ों पर जाना भी ठीक नहीं,
जहाँ रिश्तों की उलझन में ज़रा सी भी सीख नहीं।

जब तक सुलझ न जाएँ उन दो दिलों के सारे धागे,
खुद को अलग रखो, न भागो किसी आस के आगे।
सच्चा शुभचिंतक तो वही है जो बाहर से ढाल बने,
न कि दो लोगों के आपसी गुस्से का कोई मलाल बने।

घर तोड़ना नहीं, घर जोड़ना ही हमारा काम हो,
पर खुद को बचाना भी रिश्तों में सबसे पहला पैगाम हो।
दूर रहो, खामोश रहो, पर उनका भला ही चाहो,
बिना कड़वाहट बढ़ाए, बस दूर से ही दुआ दीजिए।
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile