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बेटियां

Dr. Mamta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मां बाप के हर दर्द की दवा है बेटियां
        
                                                    
                            
मान और सम्मान का निशा है बेटियां
उठ जाता है सिर जिनका, दौरे जहां में
मां बाप के उस गर्व का नशा है बेटियां

तुम सोचते ही रह गए कंधे पर बोझ है
ख्यालों में उलझे रह गए, वो कमजोर है
अबला समझ के उसको पगपग दबा दिया
नारी की जात है ये लेबल लगा दिया

तोड़ के ये बंधन जब वो निकल पड़ी
जमाने भर की वेदना धरी ही रह गई
परचम थे उसके छाए सारे जहां में
उस बेटी के कदम थे गगन के चांद पर

कोई मनु सी बनकर , माटी पर मर मिटी
कोई सावित्री सी बन यम से भी भीड़ गई
कोई चावला, सुनीता, बबीता गीता बनी
कोई बनी लता सी मूरत स्वर कोकिला हुई

न नाम एक सा था न काम एक सा था
पर शायद उनके पिता का पैगाम एक सा था
शक्ति है तू धरा की, साहस ने त्यागना
बेटी तुझे कसम है, ममता का वास्ता
धरना कदम वहीं जो, चट्टान सा टिका
मेरी बेटी फिर शुरू कर जीतो का सिलसिला

हां है परी मेरी तू, मुझे अनमोल है
बेटी मेरी किसी से नहीं कमजोर है
सपने जो भी तेरे, सपने है वो मेरे
ले जोर से हु कहता, सपनों को पंख दे

है साथ ये पिता भी माता भी साथ है
मेरी बेटी तेरा भाई तेरा बाया हाथ है
पर तू अकेली लड़ना सारे जहां से
ले आज हु मै कहता, पूरे ही नाज से
,हां बेटी है तू मेरी
हा तू बेटी है मेरी हां तू बेटी है मेरी
9 महीने पहले
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