रेज़िम चेंज से क्यों घबराना?
रेज़िम चेंज से डरते क्यों हो?
यह तो जनता का अधिकार हैं
हर पाँच वर्ष में मिलने वाला
यह संविधान का उपहार हैं !
परिवर्तन ही इस धरा का
अमर-पुरातन नियम रहा
सत्ता की इस रँगशाला में
समय हमेशा प्रथम रहा !
जो आज शिखर पर बैठे हैं
कल वह भी नीचे आएंगे
जो जन-गण-मन को भूल चुके
वह कैसे टिक पा पाएंगे?
लोकतंत्र का यही तराना
यही धर्म,यही विधान हैं
सत्ता केवल एक व्यवस्था
यहाँ जनता ही भगवान हैं !
परिवर्तन हवाओं जैसा हैं
यह बिना रुके ही बहता हैं
जो जनता के दिल को छू ले
बस वही तख्त पर रहता हैं
वादों के शीश महल में
अब आइने भी शर्माते हैं
जनता के सवालों से अब
सारे नेता घबराते हैं !
कुर्सी की इस अंधी दौड़ में
कौन पराया, कौन है अपना?
विकास का अब नया भरोसा
हर वादा अब लगता सपना !
मगर सचेत रहो ऐ हुक्मरानो
यह जनता अब नादान नहीं
कब जनता भारी पड़ जाए
इसका कोई अनुमान नहीं !
लोकतंत्र में राजनीति में
सच्चे विकास का रथ हो
भेदभाव की राहों से परे
मानवता का पावन पथ हो !
नायक कोई भी चुनकर आए
हुकूमत किसी की खास न हो
जनता का मत ही सर्वोपरि हो
सत्ता का झूठा अहसास न हो !
जो जनमत की तौहीन करेगा
वह तख्त स्वयं गिर जाएगा
जब देश की जनता जागेगी
इतिहास नया लिख जाएगा !
रेज़िम चेंज स्वीकार कीजिए
यह तो जनता का अधिकार है
हर पाँच वर्ष में वह किसे चुने
यह लोकतांत्रिक उपहार हैं !
-महेश यादव