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हम इस मुल्क़ के शहरी हैं ज़रा तमीज़ में रहिए आप...

Dr Mahesh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ना आतंकवादी,ना दहशतगर्द,और ना हम हैं गटर छाप
        
                                                    
                            
हम इस मुल्क़ के शहरी हैं,ज़रा तमीज़ में रहिए आप

अदालतें मौन साधे हैं,मीडिया का बुरा हाल हैं
सत्ता के गलियारों में,जनता बेहाल हैं

अत्याचारी अँगरेज़ों जैसा,तुमने तो भेष धर लिया
अपनों को ही लाठी मारी,अधिकारों को नीलाम किया।

नेता के बिगड़े बोलों से,आहत हैं हर दिल का अहसास
ना आतंकवादी,ना दहशतगर्द, और ना हम हैं गटर छाप

हम इस मुल्क़ के शहरी हैं
ज़रा तमीज़ में रहिए आप

चीन घुसा हैं सीमा के अंदर,तुम आँख मूँद कर बैठे हो
दुश्मन से आँख मिलाते नहीं, अपनों पर ही ऐंठे हो

देश-सुरक्षा छोड़ के तुम,जनता को आँख दिखाते हो
अपने ही घर के मालिकों को,गद्दार' कह कर बुलाते हो

माटी के रक्षकों का ही,क्यों तोड़ रहे हो तुम विश्वास
ना आतंकवादी,ना दहशतगर्द, और ना हम हैं गटर छाप

हम इस मुल्क़ के शहरी हैं
ज़रा तमीज़ में रहिए आप

अर्थव्यवस्था ढहती जा रही,बेरोज़गारी देश पर भारी हैं
विदेशों में छवि धुँधली हैं,हर तरफ़ मक्कारी हैं

किसान रोता हैं सड़कों पर,नौजवान रोज़ी को तरस रहे
जवान-किसान की ताक़त पर, क्यों जुल्म तुम्हारे बरस रहे

याद रखो ये गुरुर तुम्हारा,मिट जाएगा बनकर खाक
हम इस मुल्क के शहरी हैं,ज़रा तमीज़ में रहिए आप

देश किसी की जागीर नहीं,यह हमारा-आपका हैं
लोकतंत्र का यह मंदिर है,ना किसी बड़े साहब का हैं

ना आतंकवादी,ना दहशतगर्द, और ना हम हैं गटर छाप
हम इस मुल्क के शहरी हैं,ज़रा तमीज़ में रहिए आप

हम इस मुल्क़ के शहरी हैं
ज़रा तमीज़ में रहिए आप

 
2 महीने पहले
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