हिन्दू की हिन्दू से नफ़रत,क्यों भारत में छाई हैं
जब जब हिन्दू बट गया,तब देश पर आफत आई हैं
ऊंच नीच की भूल दोहराकर,हम अपनी जड़ें काट रहे
ईश्वर के बनाये मानव को हम,जात पात में बाँट रहे
अत्याचारी जब जब हैं आते,वह जाति कभी नहीं पूछते
वो घर जलाते उन सबके भी,जो खुद को ऊँचा मानते
अन्याय अगर तुम करते हो,अपने ही धर्म के भाई पर
नींव खोद रहे तुम अपनी,खुद ही अपनी तबाही पर
हिन्दू होगा हिन्दू का दुश्मन,तो शक्ति कहाँ से लाओगे
खंड खंड में फिर से बटकर,अपनी अस्मत खो जाओगे
घर के आंगन में अगर,नफरत की दीवार होगी
अपने ही दुश्मन होंगे,और ज़िंदगी बेज़ार होगी
ऊँच-नीच के चक्कर में एक दिन,सबकी शामत आएगी
हिन्दू की हिन्दू से नफ़रत,संकट की घड़ी फिर लाएगी
इतिहास के पन्नों को पलटो,हमने कैसी चोटें खाई थीं
खंड-खंड में जब बंटे हुए थे,तब गुलामी की बेड़ी आई थीं
गद्दारों ने गैरों से मिलकर,जब अपनों को मरवाया था
मुट्ठी भर लोगों ने हम पर,तब ज़ुल्मी राज चलाया था
ज़हर वही फिर घोल रहे हो,फिर से तुम बंट जाओगे
अबकी बार गिरे तो सोचो,फिर कैसे उठ पाओगे
एक ही जल से प्यास बुझे,एक ही अन्न भूख मिटाये
मंदिर की दहलीज़ पर,क्यों ऊंच नीच के नियम बनाये
ग़र सबका रक्त लाल हैं तो,भेद यह कैसा पाल रहे हो
अपने ही हाथों से अपना,क्यों भविष्य तुम बिगाड़ रहे हो
त्याग दो अब जाति के चश्में,एक नजर से सबको देखो
ग्रंथों की वाणी पढ़ लो,सच की डगर से सबको देखों
परम पिता जब सबका एक हैं,तो सब समान होने चाहिए
ऊंच नीच की सोच वाले को,यह बात समझनी चाहिए
जब हाथ मिलेगें हाथों से,तब अदभुत शक्ति जागेगी
जातिवाद की काली छाया,खुद देश छोड़कर भागेगी
झूठे अहंकार को छोड़ो,मानवता का धर्म चुनो
एकता के धागों से तुम,विकसित भारत का स्वप्न बुनो
न कोई ऊँचा, न कोई नीचा,हम भारत की संतान हैं
अखंडता और एकता हमारी, राष्ट्र की पहचान हैं
न कोई छोटा न कोई बड़ा,हम भारत की शान हैं
एकजुट जब हिंदू रहेंगे,तब सुरक्षित हिंदुस्तान हैं
-महेश यादव