हमने दिल बारहा टटोला है,
ये कभी बर्फ़ कभी शोला है।
ख़ुद से ही रूठता बहलता है,
बनता शातिर है मगर भोला है।
- डॉ. कुँवर वीरेन्द्र विक्रम सिंह गौतम