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निगाहों में

Dr fouzia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़ामोश इन निगाहों में
        
                                                    
                            
शिकवे हज़ार हैं
ज़ाहिर न कर सके कभी
दिल की ज़रूरतें
- फौज़िया नसीम शाद
2 घंटे पहले
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