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इबादत है

Dr fouzia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समझा है जिसे मैंने,
        
                                                    
                            
हृदय की लिखावट हो।
विश्वास की प्रतिमा तुम,
हृदय में समाहित हो।
सब भाव जुड़े तुमसे,
एहसास की माला हो।
मेरे अंतर्मन से निकली,
जैसे कोई इबारत हो।
तुमको इसका भान नहीं,
तुम प्रीत हमारी हो।
तुमसे प्रेम करूँ ऐसे,
जैसे कोई इबादत हो।
शब्दों में मन के भाव
व्यक्त करूँ मैं कैसे,
मेरे हृदय की धड़कन की
तुम जैसे ज़मानत हो।
-फ़ौज़िया नसीम शाद
2 महीने पहले
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