विज्ञापन

याद आती हैं बहुत शहनाइयाँ

Dr fouzia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उस तरफ़ हैं तेरी वो रानाइयाँ
        
                                                    
                            
इस तरफ़ हैं मेरी ये अंगड़ाइयाँ

हो रही हैं इश्क़ में रुसवाइयाँ '
डस रही हैं हिज्र में तनहाइयाँ'

चाँदनी भी रास अब आती नहीं
और बढ़ती जा रही गहराइयाँ

भूल जाएं कैसे तेरी याद हम
चल रही हैं साथ जब परछाइयाँ

दूर तक कोई नज़र आता नहीं
याद आती हैं बहुत शहनाइयाँ

इश्क़ में सहने की आदत हो गई
कम नहीं होतीं मगर तन्हाइयां

'शाद' कैसे भूल जाएं अपने ग़म
इसमें शामिल हैं मेरी बेताबियां
-फ़ौज़िया नसीम 'शाद'
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

priyanka samariya

8 कविताएं

View Profile

Kanojiya Manisha

10 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10819 कविताएं

View Profile