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बिना उम्मीद के

Dr fouzia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बिन कहे
        
                                                    
                            
बिन सुने
बिना उम्मीद के
जो उम्र भर रहा
वो एहसास
कितना प्यारा था
चढ़ के कभी
न उतरा जो
वो रंग इश्क़ का
आह !
कितना गाढ़ा था।
- फौज़िया नसीम शाद
3 महीने पहले
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