प्रतीक्षा करो,
परिधि में रहो।
कल की प्रतीक्षा करो,
फल की प्रतीक्षा करो।
जैसा कि
नोबेल पुरस्कार विजेता
अमेरिकी-अंग्रेज़ी कवि
टी. एस. इलियट ने भी कहा है-
विश्वास, प्यार और उम्मीद,
सब प्रतीक्षा में ही हैं।
पर तुम हो कि
बिना सोचे-समझे
इस विचार के लिए
तैयार ही नहीं।
प्रतीक्षा करो,
परिधि में रहो।
कल की प्रतीक्षा करो,
फल की प्रतीक्षा करो।