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घर की बातें

Dr BKS Sanjay

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब तक घर की बातें
        
                                                    
                            
घर वाले करते हैं,
तब तक घर, घर कहलाते हैं।

जैसे ही घर की बातें
बाहर निकल जाती हैं,
घर की बातें बाहर वाले करते हैं।

तब वह घर
घर नहीं रहते।
इन घरों में घर वाले तो रहते हैं
पर बाहर वाले चलाते हैं।
तब घर, घर नहीं-
रणक्षेत्र बन जाते हैं।

बेघर हो जाते हैं वे घर,
जिन घरों से विभीषण निकल जाते हैं।
जिन घरों में शकुनी आ जाते हैं,
वे घर, घर नहीं-
लंका या कुरुक्षेत्र बन जाते हैं।
2 महीने पहले
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