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कौन हूं मै

Dr. Ashok

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पता है, कौन हूँ मैं?
        
                                                    
                            
क्या जानते हो तुम मुझे?
अहंकार में स्वयं ही बोला वह—
क्या नहीं पहचानते तुम मुझे?

पूरा क्षेत्र है मेरे भाई का,
हर ओर उसी का है प्रभाव;
सैकड़ों घूमते हैं आगे-पीछे मेरे,
यही तो है मेरा स्वभाव।

यहाँ दबदबा मेरे भाई का,
किसी से मुझे भय नहीं;
कोई कितना ऊँचे पद पर हो,
कर सकता रत्ती भर क्षय नहीं।

पंगा लेने की भूल न करना,
बहुत देखे हैं मैंने तुम जैसे;
समय पड़े तो जान जाओगे,
हम नहीं हैं ऐसे वैसे।

कोई बाल भी बाँका न कर सकेगा,
मेरा बड़ा भाई है मेरे साथ;
उसके नाम की छाया में ही
फल फूल रहा हूँ मैं दिन रात।”

समय किसी से बंधा नहीं।
उत्तर दे रहा- कौन हूँ मैं?
मृत्तिका से बना है तू,
मृत्तिका में ही मिल जाना है।

न पद रहेगा, न प्रतिष्ठा,
न धन-दौलत, न अभिमान;
न भाई का वह प्रभाव रहेगा,
न साथ रहेगा कोई इंसान।

जो आज खड़े हैं आगे-पीछे,
कल अपना पथ चुन जाएँगे;
जिन पर आज है बड़ा भरोसा,
वे भी एक दिन छूट जाएँगे।

जिस नाम पर आज अकड़ते हो,
वह नाम भी मिट जाना है;
जिस सत्ता पर इतना इतराते हो,
वह सूरज भी ढल जाना है।

आज तुम्हारा है जो प्रभाव,
कल उसका भी होगा अवसान।
इसलिए छोड़ो झूठा अभिमान,
विनम्रता को अपना श्रृंगार बनाओ;
पद, पैसा और प्रभाव नहीं—
अपने कर्मों से पहचान बनाओ।
-अशोक कुमार वर्मा
2 घंटे पहले
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