आसमां क्या जाने
धरती किस मलाल में थी
सूरज चन्दा सब इसे ताकें
पर धरती बारिश के ख्याल में थी।
जब रो पड़ा बादल
तो सूरज को छुपा दिया
चांद कर बैठा बहस जब
तो उसे रात बना दिया।
तारों का साथ देकर
चांद को समझाना पड़ा
बादल ने कुछ समझौता किया
औऱ सूरज को तपिश लेकर जाना पड़ा।
अकेले ही बरसती रही बारिश
हवाएं नाराज होने लगी
ना सुलझा कोई किस्सा
सबको अलग अलग निभाना पड़ा।