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नौका जब डगमगाने लगे

Dobish Warekar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सागर की वो
        
                                                    
                            
अजीबो लहर।।
बीच सागर में
वो मछुआर।।
जब चले थे
नौका पे सवार।।
नैनन में चकाचौंध
की रौशनी का सार।।
तूफानी तरंगो पर।।
डगमगाने लगे
नौका बिहार।।
हाथ आवे मच्छी
पर फिसल जावे
उसकी डोर।।
इन तरंगों से
यूं ही डरकर।।
जीवन की नैया
लगती नहीं पार।।
प्रयास करने से
नहीं होती हार।।
रोजी रोटी और।।
सवाल है रोजगार।।
जिनका मुख्य पेशा
है मच्छी पकड़।।
श्रम कभी जाती
नहीं बेकार।।
जाल बिछा बिछाता
ही जा निरंतर।।
नौका डगमगाए भी।।
तो उन लहर।।
अपनी पतवार की।।
तेज वार कर।।
उस चुनौती को भी।।
स्वीकार कर।।
समुद्र की लहरों से
मत भाग डर कर।।
हौसला दिखा।।
कुछ कर जा।।
तभी होगी
तेरी जयकार।।
जितनी अधिक
आएगी मीन।।
उतना ही चैन से
जीवंत होगा परिवार।।
सागर की वो
अजीबो लहर।।
बीच सागर।।
में वो मछुआर।।
2 महीने पहले
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