न अंत है।।
न ही प्रारब्ध यहीं।।
बस है तो
अनंत ही कहीं।।
सिमट रहा है।।
समय अपने
चाल से वहीं।।
जिसके गणना का
कोई गणित सही नहीं।।
अंत का कोई
ओर छोर नहीं।।
समय के रहते
ही सब कुछ
होना निश्चित है
समय बिन कोई
कार्य कल्पनातीत नहीं
इसका समापन ही
शुरुआत है
उदगम है ये
काल के उत्पत्ति का
न अंत है
न ही प्रारब्ध यहीं।।
बस है तो
अनंत ही कहीं।।