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कवियों का एक ही मंच अमर उजाला

Dobish Warekar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कवियों का एक ही
        
                                                    
                            
मंच अमर उजाला
ये कविताओं के।।
प्रचार प्रसार में।।
निभाता अहम् भूमिका।।
रूपी फैलावा।।
यह पहनाता कवियों
को अमली जामा।।
सबके कसौटियों पर
खड़ा उतरने
का करता रहता।।
प्रयास सदा।।
दिल को शकुन
दे जाता इनके द्वारा।।
कवियों को दिया।।
गया सराहना।।
कभी विचलित नहीं
होता इन काव्य
समीक्षिकीय दल
की अनुशंसा।।
इनके मंच ने
खींचा काव्य श्रोता।।
कितना मधुरम है
इसकी व्यवस्था।।
तभी तो जागी।।
इनके प्रति सबकी आस्था।।
अल्फ़ाज़, हलचल
और काव्य जैसी।।
मंच पर सोच वाली
विचारों की धारा।।
इसके पाठकगण करते।।
कितना प्रेम
मंच अमर उजाला ।।
इस मंच पे अपने।।
भावों को उकेरा।।
अपनी कल्पनाशीलता।।
में भ्रमण करता।।
फिर गढ़ देता।।
अपनी कल्पनाओं
को विराम देकर
सुंदर कविता।।
अमर उजाला की
विशाल हृदया।।
का यह है परिचय
जन जन तक पहुंचना।।
कवियों का एक ही
मंच अमर उजाला।।
ये कविताओं के।।
प्रचार प्रसार में।।
निभाता अहम् भूमिका।।
 
2 महीने पहले
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