अगर वो मेरे साथ
हमेशा ही होता ।।
आज ये दिन
देखना न पड़ता।।
यूं तनाव में मेरा
दिन न कटता।।
तुझे सामने नहीं देखता।।
तो तुझमें ही खोये जाता।।
मैं हूं कौन पता ।।
तक नहीं चलता।।
किसी से लगाव को बेवजह
बदनाम किया।।
लगाव करना गर निस्वार्थ होता
तो इतनी उसमें तड़प न होता।
अगर वो आ गया होता ।।
तो न जाने क्या - क्या हो जाता
तेरा कहीं चला जाना।।
कितनी कमी खलाता होगा।।
इसका एहसास उसे
भी न होगा।।
बस ये तो आंतरिक आत्मिक
ही जानता होगा।।
ऐसा दुस्साहस कैसे
कोई कर सकता।।
तनिक भी न सोचा उसने।।
की दिमाग पर कितना
असर गहरा होगा।।
अगर वो मेरा साथ
हमेशा ही होता।।
आज ये दिन
कदापि न देखना पड़ता।।
तो न जाने क्या - क्या होता।।