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तुम्हें नहीं मालूम

Dn Chaubey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरी मंजिल तो तू है, लेकिन मंजिल का मिलना आसान नहीं है,
        
                                                    
                            
मंजिल तक पहुंचते पहुंचते रास्ते क्या क्या छीन लेते हैं,
यह तुम्हें नहीं मालूम, कोई मुसाफिर ही जानता है,
3 महीने पहले
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