जिंदगी की शाम कब ढल जाए पता नहीं है मुझे,
दर्द बांटने के लिए कोई नहीं अपना कहलाने वाले बहुत हैं,
अपनी पीड़ा, दर्द को साझा करें तो किस से करूं सनम,
तुम तो मेरे दिल के बहुत करीब है, लेकिन तुम अनजान भी बहुत है,