तुम्हारी आंखों में कुछ ऐसी कशक, बात है, जैसे चांदनी में भींगी कोई रात है,
तुम्हें देखने के बाद मुझे सुकून मिलता है, जैसे दुआओं में मांगी हुई सौगात है,