आंखों को पढ़ने की हुनर जानती है तो बोलो,
अल्फाजों से निकलकर तुम्हारे दिल मैं पहुंचा की नहीं,
मैं कागज को छोड़कर तुम्हारे दिल में उतरा की नहीं,