जो मखन लगाते हैं अक्सर उनके हाथों में चाकू होता है,
जैसे रात होते ही तुम शराब बनकर मेरी आंखों में उतर जाती है,
अब तुम को मैं अपने ख्यालों से निकाल कर कैसे फेंक दूं,
तुम मेरी भावनाओं के हर रास्ते पर बार बार दिखती है,
पता नहीं तुम को ललचाने का हुनर कैसे आता है,