जिक्र तो तेरा ही करता हूं मैं मेरी हर बातों में,
तुम को गैर से बात करता देख सोचता हूं,
आखिर कौन सी लकीर नहीं थी मेरे हाथों में,जो मुझ से पहले नहीं मिली,