अbब बेखबर हो गई तुम, मेरी जरूरत तक महसूस नहीं करती तुम,
कभी बहुत बातें किया करती थी तुम, मुझ से,
ऐसा भी क्या हुआ, अब खैरियत तक नहीं पूछती तुम,
मिल जाए निजात मजबूरियों से,तो मिल लेना अंतिम बार,