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खुद से हार जाने के बाद

Divya Tomar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी दुनिया जीत लेना चाहता था मैं,
        
                                                    
                            
आज खुद से भी हार कर बैठा हूँ,
मेरी मेहनत पर सवाल उठाने वालों,
देखो मैं अपना सब कुछ वार कर बैठा हूँ,
और एक जमाने मे हुआ करता था खुश दिल इंसान मेरे अंदर,
आईने मे देखा तो पता चला मैं उसे भी मार कर बैठा हूँ ।।
रौशनी मेरी आँखों को चुभने लगी है,
कर अंधेरों को ये इज़हार बैठा हूँ,
लोगो के बीच दम घुटने लगा है मेरा,
तभी बना चार दिवारी को अपना संसार बैठा हूँ,
सबकी हक़ीक़त से वाक़िफ़ हूँ मैं,
तभी कर तन्हाइयों से प्यार बैठा हूँ।।
10 महीने पहले
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