अंग्रेज़ी में जिसे कहते लोन,
और हिंदी में जिसे कहते उधार,
है ऐसी चीज़ जिसे लोग लेते हैं ताकि
आए उनके आर्थिक स्थिति में सुधार।
पर सुधार लाना तो दूर की बात,
ये लाती है बड़ी परेशानी।
खड़ी कर देती है ऐसी स्थिति,
जिसे देखकर होती है हैरानी।
हैरान खड़ा वो मनुष्य,
जिसका लुट चुका आन-बान-शान।
फस गया था बीच मझदार वो भी
नहीं उग पायी थी इस साल अच्छे से धान।
क्यों न ली उसने आर्थिक ज्ञान,
इस बात का उसे अफसोस है।
अब मन उसका निचोड़कर रोता,
घुटता अब वो हर रोज़ है।
अब करनी है थोड़ी और परिश्रम,
लगाना है तन-मन कुछ।
यह करने पर वो इस स्थिति से निकल जाएगा,
कहते हैं सब, वो भी सचमुच।
पर दात देनी होगी उस मेहनत की,
जो लगती है हमें फँसाने में।
अब बिना ज्ञान के लोन न लेंगे,
लगा दो सारी मेहनत अपने आप को यह बताने में।