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आज़ाद बेटियाँ

Disha Manral

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आसमान भी उनका है, ज़मीन भी उनकी है,
        
                                                    
                            
अब न रोको उन्हें, यह फ़ज़ा उनकी है।
सदियों से जो ख़ामोशी थी लबों पर,
आज गूँजती वही आवाज़ उनकी है।

पंख खोल कर उड़ने दो उन्हें सपनों के संग,
हर मोड़ पर लिखने दो नया एक रंग।
रिवाज़ों की ज़ंजीरें अब न बाँध सकें,
नयी सुबह की पहली किरण उनकी है।

डर को छोड़ कर आगे बढ़ना सीखा है,
हर चुनौती से लड़ना उन्होंने सीखा है।
आज़ादी सिर्फ़ एक लफ़्ज़ नहीं उनके लिए,
अपने वजूद को पाना उन्होंने सीखा है।

 
2 महीने पहले
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Manju Sharma

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