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ये सड़क जो दिल्ली जाती है....

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सम्भल कर चलिये
        
                                                    
                            
आतिशबाज़ी हो रही है
दामन बचाइए अपना
चिंगारियां निकल रहीं हैं.
लिबास कागज का
कितना महफ़ूज़ होता है
बच्चों की तरह यहाँ
खुद को ना बनाइये .
ये सड़क जो दिल्ली जाती है
बड़ी बेदर्द और खूनी है
गाँव का भाईचारा मिटा
बँटवारा सिखा जाती है .
शहर के मोहल्लों में
जब भी चुनाव आता है
पानी की तरह शराब की
एक नदी बहा जाती है.
हमारी बस्ती के शरीफ को
बदमाश बना जाती है
ये सड़क जो दिल्ली जाती है.
बिकास की बात की आड़ में
अनदेखा विनाश लिख जाती है.
-दिनेश चौहान
3 महीने पहले
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