वक़्त कुछ इस कदर से बंट गया सब का
बात करने के लिए कुछ भी रहा अब ना
सामने आ जायेगा कोई चेहरा जब कभी
अदब से पेश होने को मुँह खुलेगा तब ना.
-दिनेश चौहान