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रिमझिम रिमझिम पानी बरसा

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रिमझिम रिमझिम पानी बरसा
        
                                                    
                            
मन गोरी का फिर फिर तरसा.
बोल पपीहा हिय हूक जगाये
चातक बन मन रह रह तरसा.

दादुर मिल सब टेर लगायें
स्वर झींगुर सब संग मिलाये
काली रात में नींद ना आये
रिमझिम रिमझिम पानी बरसा.
-दिनेश चौहान
2 महीने पहले
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