रिमझिम रिमझिम पानी बरसा
मन गोरी का फिर फिर तरसा.
बोल पपीहा हिय हूक जगाये
चातक बन मन रह रह तरसा.
दादुर मिल सब टेर लगायें
स्वर झींगुर सब संग मिलाये
काली रात में नींद ना आये
रिमझिम रिमझिम पानी बरसा.
-दिनेश चौहान