चढ़ के पर्वत पर शिखर तो छू लिया
सौगंध खाई थी कभी वो पूरी हो गई
पर धरा की वो मनमोहक सारी सुगंध
आज मेरे पास से कोसों दूर हो गई.
-दिनेश चौहान