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निकली लड़ने कच्ची लोई

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अनुशासन बिगड़ा जब जब
        
                                                    
                            
शासन होता तगड़ा तब तब.

समझ नहीं जिनको है कोई
निकली लड़ने वो कच्ची लोई .

तमाशबीन हुई भीड़ ये सारी
रील से हो गई सब की यारी.

हल की बात कोई नहीं करता
जिसको देखो हवा ही भरता .

धैर्य प्रतीक्षा नहीं शेष है अब
संघर्षों की मनसा ही है जब.

- दिनेश चौहान
7 घंटे पहले
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