बेजुबान जानवर कटते रहे
लोग सनातनी भी बनते रहे.
अहिंसा परम धर्म है हमारा
आचरण हिंसक करते रहे.
रोटियां पहली गाय को दी
पहल अंत की भी करते रहे.
दुंदभी बजती रही इस देश में
काम पशुवत ही हम करते रहे.
दोगले व्यवहार में हम रत हुए
मित्र पशु से दुश्मनी करते रहे.
गिर गया है आदमी इतना यहाँ
संग रखा जिसे वे ही कटते रहे.
-दिनेश चौहान