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मन की नदी

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मन की नदी में बाढ़ इतनी आ गई
        
                                                    
                            
लहर उठती रहीं आंख पर छा गई.
साँस तूफ़ाँ बनीं अधर फड़फड़ाये
लटें बादलों सी चेहरे पर घिर आयी.
-दिनेश चौहान
2 महीने पहले
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