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कातिल सी रहती हरदम

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक टक देखें
        
                                                    
                            
तिरछी देखें
पलकें झुक झुक
चोर सी देखें
कातिल ही रहती ये हरदम
हमको ये जब भी देखें.

पहले मिलना
मिलकर घुलना
घुलकर दिल की
बातेँ कहना
राज हमारे खुले हुए अब
नई कहानी फिर से गढ़ना.

साथ चले जब
हाथ मले तब
राह में कांटे
पैर चुभे तब
जुगनू तारों के संग संग
चंदा भी आया जब तब.
-दिनेश चौहान
2 महीने पहले
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