एक टक देखें
तिरछी देखें
पलकें झुक झुक
चोर सी देखें
कातिल ही रहती ये हरदम
हमको ये जब भी देखें.
पहले मिलना
मिलकर घुलना
घुलकर दिल की
बातेँ कहना
राज हमारे खुले हुए अब
नई कहानी फिर से गढ़ना.
साथ चले जब
हाथ मले तब
राह में कांटे
पैर चुभे तब
जुगनू तारों के संग संग
चंदा भी आया जब तब.
-दिनेश चौहान