मदिरा नयनों से बहती जब
मन उपवन मादक हो जाता
भ्रमर भूल कर पथ अपना
बस तेरा चातक बन जाता .
अन्दर बाहर छवि तेरी दिखती
उन्माद गात संग भर जाता
गन्ध सुगंध ले तेरी काया की
कामदेव घातक बन जाता.
-दिनेश चौहान