चन्दन से लिपटे दिखे सारे यहाँ भुजंग
सत्ता मद में बेंच दी बाग की सभी सुगन्ध .
आते जाते रह गये गांव में वह हर साल
काम किया ना एक भी रहे बजाते गाल.
-दिनेश चौहान