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जैसे गलियों में भटकता पागल

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब भी टकरायेगा पर्वत से ये काला बादल
        
                                                    
                            
मुझको याद आयेगा आंखों का तेरा वो काजल
ये दरख्तों को लिये उड़ती हवाओं का सफ़र
जैसे गलियों में भटकता रहा कोई पागल .
-दिनेश चौहान
2 घंटे पहले
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