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शीशे की चमक में

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तप्त तवे सी
        
                                                    
                            
देह अब हमारी
बूँद वर्षा तू.

सारस मन
उड़ता रह गया
नभ में तेरे.

हुए क्यों ये
रक्तिम कपोल
लाज से तेरे.

उच्छ्वासों ने
स्वीकृति भर ली
आलिंगन की .

यादों में तेरी
नींद हराम हुई
व्याकुल मन.

जब से तेरे
सपनों में खो गये
बौने हो गये.

मिट्टी के हम
शीशे की चमक में
हीरे से तुम.
-दिनेश चौहान
3 महीने पहले
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