पशुओं में प्रजाति
मनुष्यों में जाति
विशिष्टताओ को दर्शाती है
कोयल और कौवे का भेद
सिंह और सियार का अन्तर
यही है पहचान का मन्तर
लोग बाघ से डरते हैं
खरगोश पर मरते हैं
सुअर देख दूर भागते हैं
मुर्गे की बांग पर जागते हैं
प्रजाति गुण अवगुण बताती है
जाति भी ऐसा ही अन्तर दिखलाती है
सात्विक राजसिक तामसिक प्रवृत्तियां
अलग अलग जातियां बनाती हैं
बस जातिवादी भावना ही
जातियों को बुरा बनाती है
मानव और मानव में
फर्क करना सिखलाती है.
हर जाति का अपना गुण है
वह उसमें निपुण है
यही निपुणता उसे विशिष्ट बनाती है.
समाज की संरचना को वो भाती है.
-दिनेश चौहान