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गालियाँ आबाद हैं

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर कोई आजाद है
        
                                                    
                            
अब वतन आजाद है
गालियाँ बकते रहो
सड़क पर चलते रहो
मन में आए बात जो
सबको वही कहते रहो
देश का अपमान हो
बस तुम्हारा मान हो
कोई छोटा ना बड़ा
लम्बी बस जुबान हो
पद की मर्यादा नहीं
उम्र की सीमा नहीं
अब बुजुर्गों और बच्चों की
कोई निश्चित हद नहीं.
अब हर कोई आजाद है
या कहो बर्बाद है
अब वतन आजाद है
गालियाँ आबाद हैं.

- दिनेश चौहान
13 घंटे पहले
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