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गालियाँ आबाद हैं

                
                                                         
                            हर कोई आजाद है
                                                                 
                            
अब वतन आजाद है
गालियाँ बकते रहो
सड़क पर चलते रहो
मन में आए बात जो
सबको वही कहते रहो
देश का अपमान हो
बस तुम्हारा मान हो
कोई छोटा ना बड़ा
लम्बी बस जुबान हो
पद की मर्यादा नहीं
उम्र की सीमा नहीं
अब बुजुर्गों और बच्चों की
कोई निश्चित हद नहीं.
अब हर कोई आजाद है
या कहो बर्बाद है
अब वतन आजाद है
गालियाँ आबाद हैं.

- दिनेश चौहान
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9 घंटे पहले

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